बिहार जमीन सर्वे पर रोक , लोगों को मिल गई राहत


बिहार में भूमि सर्वेक्षण और पारिवारिक बंटवारे पर भ्रम: एक स्पष्ट जानकारी

बिहार में भूमि सर्वेक्षण का कार्य तेजी से हो रहा है, लेकिन इसके साथ कई लोगों के मन में कई तरह की गलतफहमियां और भ्रम भी उत्पन्न हो गए हैं। सबसे प्रमुख भ्रम यह है कि सर्वेक्षण के दौरान पारिवारिक बंटवारा भी हो जाएगा। परन्तु हालिया अपडेट के अनुसार, यह स्पष्ट कर दिया गया है कि भूमि सर्वेक्षण से पारिवारिक बंटवारा नहीं होगा।

भूमि सर्वेक्षण का उद्देश्य क्या है?

भूमि सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य यह है कि जमीन का नया खतियान (भूमि रिकॉर्ड) तैयार किया जाए। इससे यह तय होगा कि कौन व्यक्ति किस जमीन का मालिक है। यह प्रक्रिया आवश्यक है ताकि लोगों को उनकी जमीन पर कानूनी अधिकार मिल सके और वे विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें, बैंक से लोन ले सकें, आदि। लेकिन यह ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है कि इस सर्वेक्षण का उद्देश्य सिर्फ भूमि के दस्तावेजों को अपडेट करना है, न कि पारिवारिक बंटवारे को निष्पादित करना।

पारिवारिक बंटवारा कैसे होता है?

पारिवारिक बंटवारा पूरी तरह से आपसी सहमति पर निर्भर करता है। मान लीजिए कि चार भाई एक ही जमीन के हिस्सेदार हैं, तो उन भाइयों को आपस में सहमति बनानी होगी कि किसे कौन-सा हिस्सा मिलेगा। कोर्ट या कोई सरकारी अधिकारी अपने आप बंटवारा नहीं कर सकते हैं।

अगर आप पारिवारिक बंटवारा करना चाहते हैं, तो आप एक लिखित बंटवारा नामा (विभाजन दस्तावेज) बना सकते हैं। इसे आप सर्वेक्षण के समय जमा कर सकते हैं, जिससे सर्वेक्षण के दस्तावेज़ में इसे दर्ज किया जा सके। लेकिन अगर आप यह दस्तावेज जमा नहीं भी करते, तब भी आपका पारिवारिक बंटवारा सर्वेक्षण के आधार पर नहीं किया जाएगा।

सर्वेक्षण में पारिवारिक बंटवारा शामिल क्यों नहीं है?

भूमि सर्वेक्षण का कार्य सिर्फ यह तय करने के लिए किया जा रहा है कि वर्तमान में किसके नाम से जमीन है और उस पर किसका अधिकार है। यह काम जमीन के मालिकाना हक को सुनिश्चित करने के लिए है। परिवारों के अंदर की आपसी सहमति या बंटवारे के मामलों को इसमें शामिल नहीं किया गया है क्योंकि यह व्यक्तिगत मामला होता है।

सर्वेक्षण के बाद क्या करें?

यदि आपने बंटवारा नामा नहीं बनाया है, तो सर्वेक्षण के बाद आप यह दस्तावेज़ बना सकते हैं और उसे सरकारी दस्तावेज़ में दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए परिवार के सभी सदस्यों की सहमति जरूरी है। अगर पहले से ही जमीन का बंटवारा हो चुका है, तो उसे लिखित में दर्ज करवाना सही रहेगा ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो।

निष्कर्ष

भूमि सर्वेक्षण एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, लेकिन इसे पारिवारिक बंटवारे से जोड़कर देखना गलत है। अगर आप पारिवारिक बंटवारा चाहते हैं, तो उसे आपसी सहमति से करना होगा। भूमि सर्वेक्षण का मकसद सिर्फ जमीन के सही रिकॉर्ड्स को तैयार करना है ताकि सभी को कानूनी अधिकार मिले और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

सुझाव: अगर आपके पास जमीन है और आप पारिवारिक बंटवारा चाहते हैं, तो एक बंटवारा नामा तैयार करें और इसे सर्वेक्षण के दस्तावेज़ में शामिल कराएं।


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